PRD College

प्रधानाचार्य सन्देश

प्रधानाचार्य श्री कौशल आर्य

शिक्षा के माध्यम से ही देश व समाज में ज्ञान, भक्ति संस्कार अनुशासन शास्वत ज्योति को प्रकाशवान बनाकर राष्ट्र को सामथ्र्यवान तथा सुदढ़ पूर्णविकसित बनाया जा सकता है - महामना पं0 मदन मोहन मालवीय की इस सारगर्भित सूक्ति साकार स्वरूप प्रदान करने के लिए महान मनीषी ऋषि तुल्य गुरू की उपाधि से विभूषित संघ के परम पूज्य द्वितीय सरसंघ चालक श्री माधव राव सदाशिवराव गोलवलकर ज्ी द्वारा युवा पीढ़ी को संस्कारवान व श्रेष्ठ देशभक्त बनाने के लिए 1952 में गोरखपुर नगर (उ0प्र0) में वीजरूप छोटे से प्राथमिक शिक्षा के विद्यालय के सरस्वती शिशु मन्दिर विद्यालय का श्री गणेश शुभारम्भ कर एक विलक्षण शिक्षा संस्थान का स्वप्न अपने मन में संजोया था जो आज 63 वर्ष की तपस्या व परिश्रम से विश्व का अजूबा विलक्षण शिक्षा संस्थान बालकेन्द्रित, क्रियाधारित, समाजपोषित पद्धति के आधार पर विकसित होकर पूरे विश्व में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के नाम से विख्यात है। जिसके मूल सिद्धान्त को मैने अपने अपने शब्दो में इस प्रकार व्यक्त किया है कि एन एज्यूकेशन सुड वी दा वेश आफ डैडीकेयर मौरालाइजेशन, पैट्रीओटैशन - कल्चरल कौलाडाइजेशन एन गुड्ससिविलाइजेशन फोर ह्यूमन वैल्यूएशन न्यूजनरेशन ।